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दुश्मनो की अब किसे जरूरत है अपने ही काफी है दर्द देने के लिए खामोशियां कभी बेवजह नहीं होती कुछ दर्द ऐसे भी होते है जो आवा…
तूफानों की दुश्मनी से न बचते तो खैर थी, साहिल से दोस्तों के भरम ने डुबो दिया। Toofano Ki Dushmani Se Na Bachte To Khair Th…