आसान नही होता यूँ मुड़कर लौट आना,
“काश” ..समझ पाते तुम ये बात ……मेरे जाने से पहले !
Ye Meri Mahobbat Aur Uski Nafrat Ka Mamla Hai,
Ai Mere Naseeb Tu Beech Mein Dakhal-Andaji Mat Kar.
ये मेरी महोब्बत और उसकी नफरत का मामला है,
ऐ मेरे नसीब तू बीच में दखल-अंदाज़ी मत कर।
Na Jane Kis Baat Pe Wo Naraj Hain Hamse,
Khwabon Me Bhi Milta Hoon To Baat Nahi Karti.
ना जाने किस बात पे वो नाराज हैं हमसे,
ख्वाबों मे भी मिलता हूँ तो बात नही करती।
Mujhse Khushnaseeb Hain Mere Likhe Ye Lafj,
Jinko Kuchh Der Tak Padhengi Nigahen Teri.
मुझसे खुशनसीब हैं मेरे लिखे ये लफ्ज,
जिनको कुछ देर तक पढ़ेगी निगाहे तेरी।
Sochta Raha Ye Raatbhar Karavat Badal Badal Kar,
Jane Wo Kyu Badal Gaya, Mujhko Itna Badalkar.
सोचता रहा ये रातभर करवट बदल बदल कर,
जानें वो क्यों बदल गया, मुझको इतना बदल कर।
Ujad Jaate Hain Sar Se Paanv Tak Wo Log Jo,
Kisi Beparwah Se Be-Panaah Mohabbat Karte Hain.
उजड़ जाते हैं सर से पाँव तक वो लोग जो,
किसी बेपरवाह से बे-पनाह मोहब्बत करते हैं।
Log Poochhte Hain Kyu Surkh Hain Tumhari Aankhe,
Hans Ke Kah Deta Hoon Raat So Na Saka,
Laakh Chaahoon Magar Ye Kah Na Sakoon,
Raat Rone Ki Hasarat Thi Ro Na Saka.
लोग पूछते हैं क्यों सुर्ख हैं तुम्हारी आँखे,
हंस के कह देता हूँ रात सो ना सका,
लाख चाहूं मगर ये कह ना सकूँ,
रात रोने की हसरत थी रो ना सका।
किसी दिन वो मेरी हँसी के दीवाने थे,
आज वो हमसे पूछते भी नहीं हैं, के हम ज़िंदा हैं या मर गये.
सोचा था एक घर बनाकर बैठूंगा सुकून से !
लेकिन घर की ज़रूरतो ने मुसाफिर बना दिया


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