एक वो था बदल गया,
एक में था बिखर गया,
एक वक़्त था गुज़र गया।
एक दिन शिकायत तुम्हे वक्त
और जमाने से नही खुद से
होगी की जिंदगी सामने थी और
तुम दुनिया मै उलझे रहे !
ना आंखो से छलकते है ना
कागज पर छपते है
कुछ दर्द ऐसे है जो अंदर ही
अंदर पनपते है !
सूनी गलियो से गुजर रहा था मै उसने
दिखाया मुझे रास्ता
मन भर गया मुझसे तो कहने लगे
पहली फुरसत मे निकलिये
ये सब तो मजाक था !
काम हो गया है तुम्हारा अब वक्त
हो गया है जाने का
कौन हो तुम किसने हक दिया
तुम्हे हमको सताने का !
इतनी शिदत से भी
प्यार ना करना
कभी किसी से जनाब
बहुत गहराई मे जाने वाले
अक्सर डुब जाते है !


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