कितने ग़ुरूर से रहते होंगे कितने इतराते होंगे,
जाने कैसे वो लोग होंगे जो उस को हर रोज़ पाते होंगे।
उस खिड़की में अब कोई नहीं रहता ,
हम भी अब सर झुकाए चुपचाप गुज़र जाते हैं।
नज़र तलाशती हैं जिसको वो प्यारा सा ख्वाब हो तुम,
मिलती हैं दुनिया सारी न मिलकर भी लाजवाब हो तुम।
गम ना करना तू भी सनम मुझे तेरी मोहब्बत पे भरोसा पूरा है,
तन्हाईयाँ चुबती हैं बस क्योंकि तेरा मेरा मिलन अभी अधूरा है।


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