बेहतर से बेहतर की तलाश करो,
मिल जाए नदी तो समंदर की तलाश करो,
टूट जाते हैं शीशे पत्थरों की चोट से,
तोड़ से पत्थर ऐसे शीशे की तलाश करो
आये हो निभाने को जब, किरदार ज़मीं पर,
कुछ ऐसा कर चलो कि ज़माना मिसाल दे।
रख हौसला वो मंजर भी आयेगा,
प्यासे के पास चल के समन्दर भी आयेगा,
थक कर न बैठ ऐ मंजिल के मुसाफिर,
मंजिल भी मिलेगी…
और मिलने का मज़ा भी आयेगा।
होके मायूस ना आँगन से उखाड़ो ये पौधे
धूप बरसी है यहाँ तो बारिश भी यही पे होगी।।
आज बादलों ने फिर साजिश की
जहाँ मेरा घर था वहीं बारिश की
अगर फलक को जिद है बिजलियाँ गिराने की
तो हमें भी जिद है वहीं पर आशियाँ बसाने की


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