हवाओं से कह दो अपनी औकात में रहे
हम परों से नहीं हौसलों से उड़ते हैं,
क्यों डरे कि ज़िन्दगी में क्या होगा
हर वक्त क्यों सोचे कि क्या होगा
बढ़ते रहे बस मंजिलो की ओर
हमें कुछ मिले या ना मिले तजुर्बा तो नया होगा
बुरा वक्त एक ऐसी तिजोरी है
जहां से सफलता के हथियार मिलते हैं !
एक सूरज था कि तारों के घराने से उठाए
आँख हैरान है क्या शख़्स ज़माने से उठा।


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