मज़िल पाना तो बहुत दूर की बात है,
गरूर में रहोगे, तो रास्ते भी न देख पायोगे।
वो जो शोर मचाते हैं भीड़ में
भीड़ ही बनकर रह जाते हैं,
वही पाते हैं जिंदगी में सफलता
जो ख़ामोशी से अपना काम कर जाते हैं।
भीङ में खङा होना मकसद नहीं हैं मेरा….,
बल्कि भीङ जिसके लिए खडी है वो बनना है मुझे
खोटा सिक्का जो समझते थे मुझे
आज मैं उनका ध्यान तोड़ आया हूँ,
जिंदगी की राहों में सफ़र लम्बा था मेरा
इसलिए क़दमों के निशान छोड़ आया हूँ।

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