वो भी क्या जिद थी जो तेरे मेरे बीच
एक हद थी
मुलाक़ात मुकम्मल ना सही
मोहब्बत बेहद थी !!
हम तो तेरे दिल की महफ़िल सजाने आये थे
तेरी कसम तुजे अपना बनाने आये थे
किस बात की सजा दी तूने हमको
हम तो तेरे दर्द को अपना बनाने आये थे !!
बहुत चाहा उसको जिसे हम पा न सके
ख्यालों में किसी और को ला न सके
उसको देख के आंसू तो पोंछ लिए
लेकिन किसी और को देख के
मुस्कुरा न सके !!
अजीब तरह से गुजर रही है ज़िन्दगी
सोचा कुछ किया कुछ हुआ कुछ
और मिला कुछ !!
मेरी हर शायरी दिल के दर्द को करता बयां
तुम्हारी आँख न भर आये कही पढ़ते पढ़ते


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