जीत निश्चित हो तो

कायर भी लड़ सकते हैं,

बहादुर वो कहलाते हैं

जो हार निश्चित हो,

फिर भी मैदान नहीं छोड़ते।

MOTIVATIONAL SHAYARI


Jeet Nishchit Ho To

Kayar Bhi Lad Sakte Hain,

Bahadur Wo Kahlate Hain

Jo Haar Nishchit Ho,

Phir Bhi Maidaan Nahin Chhodte.


हदे शहर से निकली तो गाँव गांव चली

कुछ यादे मेरे संग पाँव पाँव चली

सफर जो धुप का हुआ तो तजुर्बा हुआ

वो ज़िन्दगी ही क्या जो छांव छांव चली


क्यों डरे कि ज़िन्दगी में क्या होगा

हर वक्त क्यों सोचे कि क्या होगा

बढ़ते रहे बस मंजिलो की ओर

हमें कुछ मिले या ना मिले तजुर्बा तो नया होगा


चलता रहूँगा पथ पर

चलने में माहिर बन जाऊंगा..

या तो मंजिल मिल जायेगी

या अच्छा मुसाफिर बन जाऊंगा


बदल जाओ वक्त के साथ

या फिर वक़्त बदलना सीखो

जबूरियों को मत कोसो

हर हाल में चलना सीखो


उठो तो ऐसे उठो

कि फ़िक्र हो बुलंदी को..

झुको तो ऐसे झुको,

कि बंदगी भी नाज़ करे


आँखों में मंजिल थी,

गिरे और सँभालते रहे

आँधियों में क्या दम था

चिराग हवा में भी जलते रहे